Friday, April 12, 2024

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“कमल कपूर: एक रोमांटिक हीरो से लेकर विलेन बनने तक का सफर”

परिचय:
कमल कपूर, जिनका जन्म 22 फरवरी 1920 को पेशावर में हुआ था, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय चेहरे रहे हैं। उनका अभिनय करियर हीरो के रूप में शुरू हुआ, लेकिन कहानी उनके अनूठे अंदाज में किरदार परिवर्तन की है। आज, जिस दिन कमल कपूर का जन्मदिवस है, हम उनके उत्कृष्ट अभिनय के सफर को जानेंगे।

शुरुआती जीवन और परिवर्तन:
कमल कपूर ने अपना बचपन लाहौर में बिताया, जहां उनके बड़े भाई पुलिस में रहते थे। अपने मौसेरे भाई, पृथ्वीराज कपूर, के थिएटर से प्रभावित होकर कमल ने भी अभिनय की दुनिया की ओर कदम बढ़ाया। इनके चाचा बनने वाले पृथ्वीराज कपूर के साथ, मुंबई में वैल-इस्टैब्लिश होने पर कमल ने भी अपनी कड़ी मेहनत और अभिनय क्षमता के साथ अभिनय करने का इरादा किया।

पृथ्वीराज कपूर के साथ जुड़ाव:
साल 1944 में, पृथ्वीराज कपूर ने पृथ्वी थिएटर की स्थापना की, और इस अवसर पर उन्होंने अपने भाई कमल कपूर को नाटक ‘दीवार’ में एक अंग्रेज अफसर का किरदार निभाने का मौका दिया।

हीरो से विलेन तक:
साल 1946 में, ‘दूर चलें’ नामक फिल्म में कमल कपूर ने बतौर हीरो अपना पहला कैमरे के सामने अभिनय किया। इस फिल्म में उनकी हीरोइन थी नसीम बानो, जो सायरा बानो जी की मां थीं। हालांकि फिल्म की कारणें फ्लॉप हो गईं, लेकिन कमल कपूर ने अपने व्यक्तित्व से इंडस्ट्री में गहरा प्रभाव छोड़ा।

अभिनय करियर:
कहा जाता है कि कमल कपूर ने कुल 21 फिल्मों में हीरो का किरदार निभाया, लेकिन ज्यादातर फिल्में फ्लॉप हो गईं और इनका हीरो के रूप में करियर संघर्षमय रहा।

आगे की कहानी:
साल 1948 में, कमल कपूर के भतीजे राज कपूर ने अपनी पहली फिल्म ‘आग’ बनाई और उसमें राज जी ने अपने चाचा कमल कपूर को भी शामिल किया। इससे पहले कमल कपूर का हीरो की भूमिका में चमकने वाला सपना भंग हो गया और बाद में उन्होंने चरित्र भूमिका में कई फ़िल्में की जिसमें से डॉन में नारंग का किरदार सबसे लोकप्रिय हुआ ।मनमोहन देसाई की मर्द में भी उन्होंने अच्छी भूमिका निभाई

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